Thursday, March 6, 2025

सच कहो तो...

सच कहो तो...

बड़ी देर कर देते हैं हम 

अपने आपको पहचानने में!

बहोत देर कर देते हैं हम 

अपनी कीमत समझने में ..!

जो हमसे दूर जाना चाहते हैं,

बेशक उन्हें जाने दीजिये!

 वैसे भी उन्हे रोकने से, 

जोर जबरदस्ती से, 

फिजूल की जिद करने से,

अपना अधिकार जताने से, 

कोई रिश्ता चल भी तो नहीं सकता!

सच कहो तो...

इस आपाधापी में 

इस खिचातानी मे 

क्या सही मे अपनापन होता है ?

अक्सर सभीं का दिल रखने के लिये 

 हम खुदको ही वक्त नहीं दे पाते!

फिर भी कुछ रिश्तों को रहती है

 हमेशा हमसे ही शिकायतें!

वैसे तो इतनी थोडीसी जिंदगी मे 

 मुश्किल से वक्त मिल पाता है हमे!

जिंदगी की कश्मकश मे...

इसका पता ही नहीं चलता हमे!

सच कहो तो...

बड़ी देर कर देते हैं हम 

अपने आप को पहचानने में!

शायद हम अपनी कीमत 

बहोत पहलेही समझ पाते!

बहोत पहलेही समझ पाते!!

... विनोद श्रा. पंचभाई, पुणे ९९२३७९७७२५

 

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